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सरकार

तुम हमसे पूछ्ते हो माजरा क्या है, हम अपनी ग*** में पूरा आसमान ले लेंगे। ये मकान ले लेंगे, ये दुकान ले लेंगे, कब्रिस्तान और शमशान ले लेंगे। तुम हमसे सवाल पूछोगे, हम ग*** में तुम्हारा सुख - चैन - आराम  ले लेंगे। बचपन लेंगे, बुढ़ापा लेंगे, हम तो तुम्हारी पूरी जान ले लेंगे। तुम हमसे विकास पूछोगे,  हम ग*** में घर - दूआर खेत - खलिहान ले लेंगे। वोट नोट पेंशन हज़म कर लेंगे, हम तुम्हारा घमंड - गुमान ले लेंगे। तुम हमको बदलने की सोचोगे,  हम अपनी ग*** में सबका दिल - दिमाग - समाधान ले लेंगे।